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Bihar Vigilance Raid: कार्यपालक अभियंता संजय कुमार के पटना, नालंदा और खगड़िया ठिकानों पर एक साथ छापा

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Nalanda News | Khagaria News | आय से अधिक संपत्ति के मामले में पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता संजय कुमार के तीन ठिकानों पर विजिलेंस ने एक साथ छापेमारी की।

बिहार, 14 अगस्त। आय से अधिक संपत्ति के मामले में पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता संजय कुमार के खिलाफ विजिलेंस की कार्रवाई से शुक्रवार को प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई। विजिलेंस की अलग-अलग टीमों ने एक साथ उनके पटना, नालंदा और खगड़िया स्थित ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। जांच के दौरान जमीन-जायदाद से जुड़े दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड, निवेश संबंधी कागजात, नकदी और सोने-चांदी के आभूषणों की जानकारी जुटाई गई।

संजय कुमार वर्तमान में खगड़िया में पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता के पद पर तैनात बताए जाते हैं। विजिलेंस की कार्रवाई आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित किए जाने के आरोपों की जांच के सिलसिले में की गई है। जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि अधिकारी और उनके परिवार के नाम पर मौजूद चल-अचल संपत्तियों का मूल्य उनकी घोषित आय और वैध आय के स्रोतों के अनुरूप है या नहीं।

शुक्रवार सुबह जांच टीमों ने अलग-अलग स्थानों पर पहुंचकर कार्रवाई शुरू की। नालंदा के बिहारशरीफ स्थित संजय कुमार के पैतृक आवास पर भी टीम पहुंची। यहां कई घंटे तक दस्तावेजों और अन्य सामान की जांच की गई। घर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई और जांच पूरी होने तक बाहरी लोगों की आवाजाही पर रोक रखी गई।

तलाशी के दौरान विजिलेंस टीम ने जमीन और मकान से संबंधित दस्तावेजों को खंगाला। इसके साथ ही बैंक पासबुक, लॉकर से संबंधित जानकारी, वित्तीय संस्थानों में निवेश के कागजात और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच की गई। अधिकारियों ने घर में मौजूद परिवार के सदस्यों और कर्मचारियों से आवश्यक जानकारी ली।

13 प्लॉट की जानकारी से बढ़ी जांच

विजिलेंस की जांच में संजय कुमार और उनकी पत्नी के नाम पर 13 प्लॉट होने की जानकारी सामने आई है। अब इन जमीनों की खरीद की तारीख, स्थान, कीमत और भुगतान के स्रोत की पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसी यह मिलान करेगी कि इन संपत्तियों की खरीद के लिए इस्तेमाल धन अधिकारी की घोषित आय के अनुरूप था या नहीं।

जमीन-जायदाद के दस्तावेजों को जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों द्वारा अलग-अलग कागजात का विवरण दर्ज किया गया है और संपत्तियों से संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है।

सरकारी आवास से नकदी मिलने की जानकारी

खगड़िया स्थित सरकारी आवास से करीब 81 हजार रुपये नकद मिलने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, तलाशी पूरी होने तक कुल बरामदगी का अंतिम आधिकारिक आंकड़ा स्पष्ट नहीं हुआ था। ऐसे में सामने आई नकदी को अंतिम बरामदगी मानने से पहले विजिलेंस के आधिकारिक विवरण का इंतजार करना जरूरी है।

जांच टीम यह भी देख रही है कि घर और अन्य ठिकानों से मिली नकदी का स्रोत क्या है और उसका किसी बैंक खाते या अन्य वित्तीय लेन-देन से संबंध है या नहीं।

सोने-चांदी के आभूषणों की भी जांच

तलाशी के दौरान घर में रखे सोने और चांदी के आभूषणों की भी जांच की गई। उनकी वास्तविक कीमत का आकलन करने के लिए आभूषण विशेषज्ञ की मदद ली गई।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक करीब 300 से 350 ग्राम सोना और लगभग 250 ग्राम चांदी के आभूषणों का मूल्यांकन किए जाने की बात सामने आई है। उपलब्ध बाजार मूल्य के आधार पर सोने की कीमत करीब 18 से 18.5 लाख रुपये और चांदी की कीमत लगभग 68 हजार रुपये बताई गई है।

हालांकि, इन आंकड़ों को अंतिम आधिकारिक बरामदगी नहीं माना जा सकता। विजिलेंस की पूरी तलाशी और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही कुल संपत्ति और बरामद सामान की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

परिवार ने आरोपों को बताया गलत

तलाशी के दौरान घर पर मौजूद संजय कुमार के छोटे भाई इंद्रदेव कुमार ने आय से अधिक संपत्ति के आरोपों को गलत बताया। उनका कहना था कि छापेमारी के समय संजय कुमार घर पर मौजूद नहीं थे और खगड़िया में अपनी ड्यूटी पर थे।

परिवार के सदस्यों से भी विजिलेंस अधिकारियों ने पूछताछ की। टीम ने संपत्ति, बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों के बारे में जानकारी ली।

तीनों स्थानों पर दस्तावेजों की पड़ताल

विजिलेंस की कार्रवाई सिर्फ आवासीय परिसरों तक सीमित नहीं रही। पटना, बिहारशरीफ और खगड़िया में मौजूद रिकॉर्ड की जांच के जरिए अधिकारी संपत्ति की पूरी तस्वीर तैयार करने में जुटे हैं।

जांच का मुख्य बिंदु यह है कि संजय कुमार की वैध और घोषित आय कितनी है तथा उनके नाम या परिवार के नाम पर अर्जित संपत्ति का वास्तविक मूल्य कितना है। इसके लिए जमीन के कागजात, बैंकिंग लेन-देन, निवेश, नकदी और आभूषणों से संबंधित जानकारी को एक साथ देखा जा रहा है।

खगड़िया में उनके सरकारी कार्यालय से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। विभागीय दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की पड़ताल का उद्देश्य यह पता लगाना है कि मामले से संबंधित कोई अतिरिक्त वित्तीय या संपत्ति संबंधी तथ्य तो मौजूद नहीं है।

अंतिम तस्वीर जांच पूरी होने के बाद

विजिलेंस की यह कार्रवाई फिलहाल जांच के चरण में है। तलाशी के दौरान सामने आई संपत्ति और सामान का अंतिम मूल्यांकन अभी बाकी है। इसलिए शुरुआती तौर पर सामने आए आंकड़ों को अंतिम निष्कर्ष मानना उचित नहीं होगा।

जांच एजेंसी अब बरामद दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड का विश्लेषण करेगी। इसके बाद यह निर्धारित किया जाएगा कि अधिकारी के पास मौजूद संपत्ति उनकी ज्ञात आय से कितनी अधिक है।

यदि दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच में आय से अधिक संपत्ति के आरोप प्रमाणित होते हैं तो मामले में आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारी और उनके परिवार को अपना पक्ष रखने का अधिकार रहेगा।

फिलहाल तीनों ठिकानों पर हुई कार्रवाई ने सरकारी अधिकारियों की संपत्ति और आय के बीच पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं। अब निगरानी की विस्तृत जांच रिपोर्ट से ही यह साफ होगा कि कुल कितनी संपत्ति सामने आई और आरोपों की वास्तविक स्थिति क्या है।

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संपादकीय दृष्टिकोण: जांच के बाद ही सामने आए पूरी सच्चाई

सरकारी पद पर बैठे किसी अधिकारी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला गंभीर होता है। ऐसे मामलों में जांच का उद्देश्य केवल छापेमारी तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि संपत्ति अर्जित करने के स्रोत और उसकी वास्तविक कीमत की पूरी पड़ताल जरूरी है।

संजय कुमार के मामले में तीन अलग-अलग स्थानों पर एक साथ हुई कार्रवाई से साफ है कि जांच का दायरा व्यापक रखा गया है। जमीन के 13 प्लॉट, बैंक रिकॉर्ड, निवेश, नकदी और आभूषणों से जुड़ी जानकारी को एक साथ देखने के बाद ही संपत्ति की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।

हालांकि छापेमारी में सामने आई किसी भी संपत्ति या नकदी को सीधे तौर पर अवैध संपत्ति मान लेना उचित नहीं है। अंतिम निष्कर्ष दस्तावेजों, आय के स्रोत और कानूनी जांच के आधार पर ही निकलना चाहिए।

अगर जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं अगर जांच में आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो संबंधित अधिकारी को भी अपनी स्थिति स्पष्ट करने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। पारदर्शी और निष्पक्ष जांच ही इस पूरे मामले की विश्वसनीयता तय करेगी।

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